एफएसपीए अधिनियम: जानिए सब कुछ

एफएसपीए अधिनियम भारतीय सेना द्वारा आतंकवाद और विद्रोह के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए लागू किया जाता है। यह अधिनियम अनुच्छेद 355 के तहत लागू किया जाता है और कुछ विशेष राज्यों में लागू होता है। इस अधिनियम का प्रमुख उद्देश्य लोगों की सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को बनाए रखना है।

अधिनियम का नाम एफएसपीए अधिनियम
संख्या अनुच्छेद 355
अंतिम संशोधन 2015

इस अधिनियम के तहत सेना को विशेष अधिकार और सामाजिक विशेषाधिकार दिए गए हैं, जिससे वह आतंकवाद और विद्रोह के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकती है। यह अधिनियम कई विवादों का केंद्र बना चुका है, और इसके प्रति विभिन्न सामाजिक समूहों और राजनीतिक दलों की अलग-अलग राय है।

इस अधिनियम की शुरुआत 1958 में नागालैंड के विद्रोह के दौरान की गई थी, और इसको बाद में कई और राज्यों में भी लागू किया गया। इसके प्रमुख विशेषताएँ शांति व्यवस्था की कायमीता बनाए रखना, आतंकवादियों और विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई करना और जनता की सुरक्षा को बनाए रखना है।

मामले की जांच की जरूरत

एफएसपीए अधिनियम का प्रयोग कई विवादों का कारण बना चुका है। इसके तहत सेना को बिना किसी विशेष अनुमति के लोगों पर कार्रवाई करने की अनुमति होती है, जिससे कई बार मानवाधिकार की उल्लंघन होती है। इसके प्रयोग में बेसी के कई मामलों में ऐसा देखा गया है कि सेना द्वारा अनर्गल कार्रवाई की गई है, जिससे जनता में विरोधिता बढ़ गई है।

राज्य आतंकवादी हमले अफस्पा के तहत कार्रवाई
कश्मीर 100 80
मिजोरम 50 40
असम 30 20

समाप्ति

इस अधिनियम को लेकर बहुत सी चर्चाएँ और विवाद हुए हैं, और कई बार सरकार ने इसे समाप्त करने की बातें की हैं। कुछ राज्यों में इसे समाप्त कर दिया गया है, लेकिन कश्मीर, मिजोरम और असम जैसे राज्यों में यह अधिनियम अभी भी लागू है।

यह अधिनियम एक ऐसा विषय है जिसपर हमें गौर करना चाहिए और सही राय बनानी चाहिए। इसकी सुरक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ, इसका दुष्प्रभाव भी खेताब होता है। इसलिए हमें समझदारी से निर्णय लेना चाहिए कि कैसे इसे व्यावसायिक तरीके से लागू किया जाए और जनता की सुरक्षा को बनाए रखा जाए।

Top 10 Legal Questions About AFSPA Law in Hindi

Question Answer
क्या AFSPA कानून भारतीय संविधान के खिलाफ है? नहीं, AFSPA कानून भारतीय संविधान के तहत बनाया गया है और इसकी वैधता को न्यायिक प्रक्रिया से स्थायी ठहराया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और कठिन परिस्थितियों में शांति बनाए रखना है।
AFSPA कानून का प्रभाव कितने राज्यों में है? AFSPA कानून का प्रभाव वर्तमान में जम्मू-कश्मीर, असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, और मणिपुर में है। इसके अलावा त्रिपुरा में भी संशोधित रूप से आमल में आ गया है।
क्या AFSPA का उपयोग विशेष प्रकार से किया जा सकता है? हां, AFSPA द्वारा दी गई शक्तियों का उपयोग संशोधित ढंग से किया जा सकता है, लेकिन इसे अविवादित स्थितियों में ही किया जाना चाहिए। यह अवश्यकता है कि इसका उपयोग शांति और सुरक्षा के लिए हो और यह न्यायिक तथा नैतिकता के पर्याय को ध्यान में रखते हुए किया जाए।
AFSPA के तहत किसी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कैसे होती है? AFSPA के तहत, सशस्त्र बलों को विशेष शक्तियां दी गई हैं, जिससे किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने में वे स्वतंत्र होते हैं। इसलिए, इस मामले में कार्रवाई करने से पहले बहुत सावधानी और विचारवानी बरतनी चाहिए।
क्या AFSPA के तहत सशस्त्र बलों की कार्रवाई पर न्यायिक परेशानी हो सकती है? हाँ, अगर किसी की मृत्यु या हिंसात्मक बर्ताव के मामले में AFSPA के तहत सशस्त्र बलों की कार्रवाई पर न्यायिक परेशानी हो सकती है। इसलिए, इसे बिना सोचे-समझे और अनावश्यक तरीके से नहीं उपयोग किया जाना चाहिए।
AFSPA के तहत किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कितनी प्रमाणिकता चाहिए? AFSPA के तहत, किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रमाणिकता का स्तर बहुत उच्च होता है। इसमें साक्ष्यों की प्रमाणिकता और विश्वसनीयता का भी ध्यान रखना चाहिए।
AFSPA का संशोधन कितनी बार किया जा चुका है? भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर में लगू AFSPA का संशोधन 5 बार किया गया है, जबकि अरुणाचल प्रदेश में 3 बार, मेघालय में 4 बार, और मणिपुर में 7 बार संशोधन किया गया है।
AFSPA का संशोधन किस संसदीय सत्र में किया गया था? जम्मू-कश्मीर में AFSPA का संशोधन 2019 के विशेष राज्य सभा सत्र में किया गया था, जिस

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